॥ मेरी कुछ कविताएं ॥

प्रार्थना
निवेदन
नैराश्य
दूसरा निवेदन

यथार्थ

ढलती रही रात..

तीसरा निवेदन

मानवता के फूल

आज नहीं लेकिन उस क्षण आना

धर्म-कर्म

हर रोज़