|| प्रार्थना ||
उन्माद नीरद छा जाए
मेरा उर उर्वर हो आए
आसक्ति मिट जाए
अनुरक्ति हो आए
सुधा मधु की वर्षा
निर्वेद विषाद का करे सर्वनाश
निशांत पल्लवित कर
निर्वाण सौरभ आए
अज्ञेय रूप दे
बना कर निराला
महादेवी का सिखा राग
मुझमें भर दे नीरव मधुर प्राण ॥